सेक्स और टाइमिंग: क्या फोरप्ले ही असली गेम-चेंजर है?
आज की तेज़ रफ़्तार वाली दुनिया में रिश्तों में अंतरंगता को लेकर एक बड़ा सवाल अक्सर उठता है — क्या सेक्स की 'टाइमिंग' कम होने से रिश्ता कमजोर पड़ता है? कई विशेषज्ञ कहते हैं कि असली बात सेक्स की अवधि नहीं, बल्कि फोरप्ले की गुणवत्ता है। सेक्स हेल्थ विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में बहुत से लोग अभी भी फोरप्ले को एक "ऐड-ऑन" की तरह देखते हैं, जबकि विज्ञान बताता है कि यह इंटरकोर्स से भी ज़्यादा महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। kaई अध्ययनों के अनुसार: • फोरप्ले जितना लंबा, उतना ही बेहतर शारीरिक और भावनात्मक कनेक्शन बनता है। •महिला पार्टनर के लिए ऑर्गैज़्म का सबसे बड़ा फैक्टर इंटरकोर्स नहीं, बल्कि प्री-इंटिमेसी होता है। •रिलेशनशिप में संतुष्टि का स्तर 40–50% तक फोरप्ले की क्वालिटी पर निर्भर करता है। ● कपल्स के लिए हेल्थ-फोकस्ड, सेफ़ पोज़िशन . 1. मिशनरी (Missionary) यह पोज़िशन सबसे कॉमन और सबसे कम्फर्टेबल मानी जाती है। फेस-टू-फेस कनेक्शन बेहतर होता है। धीमी और इमोशनल बनावट के लिए उपयुक्त। फोरप्ले के बाद इसे शुरू करना कपल्स के लिए आसान रहता है। 2. वुमन ऑन टॉप (Cowgirl) इसमें कंट्र...